इलेक्ट्रिक व्हीकल में इस्तेमाल होती हैं ये इलेक्ट्रिक मोटर

अलग अलग प्रकार के इलेक्ट्रिक मोटर

इलेक्ट्रिक वेहिकल्स (EV) का भारत और दुनिया भर में ज्यादा डिमांड हो रह है क्योंकि इनकी चलने की कोस्ट कम है और एनवायरमेंट पे भी कम असर पडता है। डाटा के हिसाब से, 6.89 लाख EVs (जिसमें डो-पहिए, टीन-पहिए और चार-पहिए सभी शामिल है) भारत में जुन 2023 के बीच बेचे गये हैं। किसी भी EV में कंपोनेंट बैटरी, आनबोर्ड चार्जर, इनवर्टर, मोटर कंट्रोलर, और मोटर होता है। मोटर वोह हिस्सा है जो बैटरी से आने वाली इलेक्ट्रिकल एनर्जी को मेकानिकल एनर्जी में बदलता है और इलेक्ट्रिक वेहिकल को चलता है। आईये जानते है की मार्किट में EVs में के लिए कौन कौन से प्रकार की मोटर आती है।

1. ब्रशलेस डायरेक्ट करेंट मोटर (BDLC)

BLDC Motor
BLDC Motor

यह मोटर एक रोटर और एक स्टेटर से बनता है। रोटर में परमानेंट मैग्नेट लगे होते हैं, और स्टेटर में कोपर विंडिंग। स्टेटर विंडिंग को करेंट सप्लाय करता है एक इलेक्ट्रानिक कंट्रोलर, जो करेंट को बदलता है रोटर के पोजीशन के हिसाब से। कंट्रोलर सेंसर या अल्गोरिथ्म से पाता लगता है रोटर का पोजीशन, और एक ट्रैपजोइडल बैक ईऍम्‌ऍफ़्‌ बनता है, जो मोटर को चलता है। BLDC मोटर के बहुत सारे बेनेफिट्स हैं EV में इस्तेमाल के लिए, जैसे:

  • हाइ एफिसिएंसी: BLDC मोटर में कोई ब्रश या कम्युटेटर्स नहीं होते, जो फ्रिक्शन और एनर्जी लास करते हैं. और भी इसमें लो आयरन लोस और हाइ पावर फैक्टर होते हैं, जो हाइ एफिसिएंसी देते हैं।
  • हाइ पावर डेंसिटी: BLDC मोटर का डिजाइन कम्पेक्ट और लाइटवेट होता है, हाइ टोर्क और स्पीड के साथ. यह कम स्पेस और वेट में हाइ पावर देते हैं।
  • मेंटेनेंस-फ्री: BLDC मोटर को ब्रश या कम्युटेटर्स चेंज करने की जरूरत नहीं होती, जो मेंटेनेंस कोस्ट और डाउनटाइम कम करते हैं। इसका रिलियाबिलिटी और ड्यूरेबिलिटी भी हाइ होता है।
  • गुड कंट्रोल अंड परफारमेंस: BLDC मोटर स्पीड और टोर्क का प्रेसिस और स्मूथ कंट्रोल डेटा है, फास्ट रिस्पांस और वाइड आपरेटिंग रंगे के साथ। यह हाइ टेम्परेचर और हर्ष एनवायरमेंट में भी चल सकता है। बीऍल्‌डीसी मोटर सबसे ज्यादा पसंद किया जटा है EVs के लिए, खास तौर पे इलेक्ट्रिक साइकल, टू-व्हीलर, और लो-पावर फोर-व्हीलर के लिए।
  • कुछ EV मैनुफैक्चरर जो BLDC मोटर्स इस्तेमाल करते हैं: हीरो इलेक्ट्रिक, एथर एनर्जी, टेस्ला, और निस्सन हैं.

2. परमानेंट मैग्नेट सिंक्रोनस मोटर (PMSM)

PMSM motor
PMSM motor

यह मोटर BLDC जैसा ही होता है, लेकिन इसका बैक ईऍम्‌ऍफ़्‌ साइनुसाइडल होता है ट्रैपजोइडल की जगाह.साइनुसाइडल बैक EMF कंट्रोलर से दिए गये साइनुसाइडल करेंट से मैच करता है, जो हार्मोनिक लोस कम करता है और एफिसिएंसी बढ़ता है। PMSM मोटर का टोर्क डेंसिटी और टोर्क रिपल भी बीऍल्‌डीसी से ज्यादा होता है, जो परफारमेंस और स्मूथनेस बढ़ता है. लेकिन PMSM मोटर में कुछ दिखते भी होती हैं, जैसे:

  • हाइ कोस्ट अंड वेट: PMSM मोटर में BLDC से ज्यादा परमानेंट मैग्नेट चाहिए होते हैं, जो मोटर का कोस्ट और वेट बढ़ते हैं। परमानेंट मैग्नेट डिमैग्नेटाइज़ेशन और टेम्परेचर वेरिएशन से भी प्रभावित होते हैं।
  • कम्प्लेक्स कंट्रोल सिस्टम: PMSM मोटर को चलाने के लिए बीऍल्‌डीसी से ज्यादा कम्प्लेक्स कंट्रोल सिस्टम चाहिए होता है, जो सेंसरलेस अल्गोरिथ्म या ऍफ़्‌ओसी तकनीक इस्तेमाल करता है। यह तरीके कंप्यूटेशनल कम्प्लेक्सीटी और हार्डवेयर की जरूरतों को बढ़ते है।
  • पीऍम्‌ऍस्‌ऍम्‌ मोटर कुछ हाइ-एण्ड EVs में इस्तेमाल होता है, जो हाइ परफारमेंस और क्वालिटी मांगते हैं, जैसे लक्जरी कार और स्पोर्ट कार।
  • कुछ उद्धरण उन EV मैनुफैक्चरर के जो की PMSM मोटर्स का प्रयोग करते हैं : BMW, ऑडियो, जैगवार, और पोरशय हैं।

3. सिंक्रोनस रिलक्टेंस मोटर (SRM)

SRM मोटर
SRM मोटर

यह मोटर का रोटर में कोई मैग्नेट या विंडिंग नहीं होते, सिर्फ सेलियन्ट पोल होते हैं जो स्टेटर मैग्नेटिक फील्ड के साथ लाइनअप होते हैं। स्टेटर विंडिंग को करेंट सप्लाय करता है एक इलेक्ट्रानिक कंट्रोलर, जो करेंट को बदलता है रोटर के पोजीशन के एकॉर्डिंग। कंट्रोलर सेंसर या अल्गोरिथ्म से पाटा लगता है रोटर का पोजीशन, और एक पल्सेटिंग टोर्क बनता है जो मोटर को चलता है। SRM मोटर के कुछ फायदे हैं जो EV में इस्तेमाल किये जा सकते है, जैसे:

  • हाइ एफिसिएंसी: SRM मोटर में कोई परमानेंट मैग्नेट या ब्रश नहीं होते जो लोस्स या हीटिंग करते हैं। और भी इसमें लो आयरन लोस और हाइ पावर फैक्टर होते हैं जो हाइ एफिसिएंसी देते हैं।
  • लो कोस्ट अंड सिम्पल कंस्ट्रक्शन: SRM मोटर का स्ट्रक्चर सिम्पल और स्ट्रांग होता है, रोटर में कोई मैग्नेट या विंडिंग नहीं होती। इसमें कम मैटीरियल और कंपोनेंट्स इस्तेमाल होते हैं, दुसरे मोटर्स से कंपेयर करके जो कोस्ट और कम्प्लेक्सीटी कम करते हैं।

SRM मोटर के नुकसान

SRM मोटर में आपको कई सारे फायदे देखने को मिल जाते है, लेकिन SRM मोटर में कुछ परेशानिया भी होती हैं जैसे:

  • लो पावर डेंसिटी: SRM मोटर का टोर्क-टो-वेट रेटियों दुसरे मोटर्स से कम होता है जो इसका पावर आउटपुट और परफारमेंस लिमिट करता है। इसमें रोटर और स्टेटर के बीच एक बड़ा एयर गप होता है, जो मैग्नेटिक फ्लक्स लिंकेज कम करता है।
  • हाइ टोर्क रिपल अंड एकोस्टिक नोइसे: SRM मोटर एक पल्सेटिंग टोर्क प्रोड्यूस करता है जो आपरेशन में वाइब्रेशन और नोइसे करता है। इसमें करेंट और वोल्टेज वेवफार्म में हारमोनिक्स भी जनरेट होते हैं जो पावर क्वालिटी और एफिसिएंसी को एफेक्ट करते हैं।
  • सोफिस्टिकेटेड कंट्रोल सिस्टम: SRM मोटर को चलाने के लिए एक सोफिस्टिकेटेड कंट्रोल सिस्टम चाहिए होता है ,जो सेंसरलेस अल्गोरिथ्म या डीटीसी तकनीक का इस्तेमाल करता है। यह तकनीक कंप्यूटेशनल कम्प्लेक्सीटी और हार्डवेयर रिक्वायरमेंट को बढ़ती हैं।
  • ऍस्‌आर्‌ऍम्‌ मोटर कुछ EVs में इस्तेमाल होते है, जो हाइ एफिसिएंसी और लो कोस्ट मांगते हैं, जैसे हाइब्रिड वेहिकल्स और बसे। कुछ उद्धरण ऐसे EV मैनुफैक्चरर के जो ऍस्‌आर्‌ऍम्‌ मोटर्स का प्रयोग करते हैं : टोयोटा, होंडा, वोल्वो, और BYD।

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