हाइड्रोजन फ्यूल सेल व बैटरी में से कोनसा है व्हीकल के लिए ज्यादा बढ़िया

हाइड्रोजन फ्यूएल सेल: इलेक्ट्रिक वेहिकल्स का फ्यूचर?

इलेक्ट्रिक वेहिकल्स (EVS) ग्रीनहाउस गैस एमिशन और फासिल फ्यूल्स पे डिपेंडेंस कम करने का एक तरीका बन रहे हैं। लेकिन सभी EVs एक जैसे नहीं होते। जबकी ज्यादातर EVs बैटरी का इस्तेमाल करते हैं इलेक्ट्रिसिटी स्टोर और डेलिवर करने के लिए, कुछ EVs हाइड्रोजन फ्यूएल सेल्स का भी इस्तेमाल करते हैं इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करने के लिए।

हाइड्रोजन फ्यूएल सेल्स ऐसे डिवाइस हैं जो हाइड्रोजन और आक्सीजन को मिला कर इलेक्ट्रिसिटी और वाटर प्रोड्यूस करते हैं। जोकी सिर्फ बाई-प्रोडक्ट होता है। इस ब्लाग पोस्ट में, हम हाइड्रोजन फ्यूएल सेल वेहिकल्स (FCEVs) के फायदे और चैलेंज को एक्सप्लोर करेगें और उन्हें बैटरी इलेक्ट्रिक वेहिकल्स (BEVs) से कंपेयर करेगें।

एफसीवी कैसे काम करते हैं?

हाइड्रोजन फ्यूएल सेल इंजन
हाइड्रोजन फ्यूएल सेल इंजन

एफसीवी हाइड्रोजन से चलते हैं, जो हाइ-प्रेशर टैंक्स के अंदर वेहिकल में स्टोर किया जाता है। हाइड्रोजन को फ्यूएल सेल स्टेक में फीड किया जटा है, जहाँ पे वो एयर से आक्सीजन के साथ रिऐक्ट करके इलेक्ट्रिसिटी और पानी प्रोड्यूस करता है। इलेक्ट्रिसिटी का इस्तेमाल फिर इलेक्ट्रिक मोटर को पावर देने के लिए किया जाता है, जो व्हील्स को ड्राइव करता है। पानी को वैपर के रुप में रिलीज किया जाता है या फिर बाद में इस्तेमाल करने के लिए स्टोर किया जाता है। .

एफसीवी के क्या फायदे हैं?

  1. एफसीवी के BEVs के मुकाबले कई सारे फायदे हैं, खास कर लम्बी रेंज, हेवी-ड्यूटी, एप्लिकेशन्स, आतियादी। इन सभी फायदों में से कुछ फायदों को निचे बताया गया है :
  2. एफसीवी का ड्राइविंग रंगे बेव से ज्यादा होता है, क्योंकि वो पर यूनिट मास में बैटरी से ज्यादा एनर्जी स्टोर कर सकते है। जैसे, टोयोटा मिराई, एक एफसीवी सेडन, जिसकी रेंज लगभग 500 km है, जबकी टेस्ला माडल 3, एक BEV सेडन, जिसकी रेंज लगभग 400 km है.
  3. एफसीवी को रिफ्यूल करना BEVs से ज्यादा तेज होता है, क्योंकि उन्हें सिर्फ अपने हाइड्रोजन टैंक्स को फिलअप करना होता है, जिसमे लगभग 5 मिनिट लगता है, जबकी BEVs को अपनी बैटरी को रिचार्ज करना होता है, जो 30 मिनिट से लेकर कई घंटे टाक का समय लेलेता है।
  4. एफसीवी का मेंटेनेंस कोस्ट BEVs से काम होता है, क्योंकि उनमें काम मूविंग पार्ट होते हैं और वो टाइम के साथ बैटरी डिग्रेडेशन से सफर नहीं करते।
  5. एफसीवी ज्यादा एनवायरमेंटली फ्रेंडली होते हैं BEVs से, क्योंकि वो कोई हर्मफुल टेलपाइप एमिशन नहीं निकलते, सिर्फ वाटर वैपर और गरम हवा ही निकलते है। और अगर हाइड्रोजन रेनवेबल सोर्स से प्रोड्यूस किया जाए, जैसे सोलर या विंड पावर, टो एफसीवी का ओवरल कार्बन फुटप्रिंट बहुत काम हो सकता है।

एफसीवी के क्या चैलेंज हैं?

एफसीवी
एफसीवी

हाइड्रोजन फ्यूएल सेल EV को भी कुछ चैलेंज का सामना करना पड़ता है जो उनके वाइडस्प्रेड एडोप्शन को लिमिट करते हैं। इन्हे चैलेंजेज में से कुछ निचे दिए गए है:

  1. एफसीवी ज्यादा एक्सपेंसिव होते हैं बेव से, क्योंकि उन्हें ज्यादा कम्प्लेक्स और कास्टली कंपोनेंट्स की जरूरत होती है, जैसे फ्यूएल सेल्स, हाइड्रोजन टैंक्स, और हाइड्रोजन सेंसर। ज्यादातर रीजन में हाइड्रोजन की लागत भी इलेक्ट्रिसिटी से ज्यादा होता है।
  2. हाइड्रोजन फ्यूएल सेल EV का एनर्जी एफिसिएंसी कम होता है BEVs से, क्योंकि वो कुछ एनर्जी लोस्स करते हैं, फ्यूएल सेल में हाइड्रोजन को इलेक्ट्रिसिटी में कन्वर्ट करने में और हाइड्रोजन को कम्प्रेस और ट्रांसपोर्ट करने में। एफसीवी का एनर्जी एफिसिएंसी लगभग 30-35% होता है, जबकी बेव का 80-90%.
  3. एफसीवी का लिमिटेड अवेलेबिलिटी होता है , क्योंकि उनके डिमांड को पूरा करने के लिए उतने हाइड्रोजन स्टेशन नहीं होते। 2020 टाक, दुनिया भर में सिर्फ लगभग 470 हाइड्रोजन स्टेशन थे, जिसमे से अधिकतर जपान, यूरोप, और कैलिफोर्निया में थे। वही, 2019 में दुनिया भर में लगभग 7.3 मिलियन चार्जिंग आउटलेट थे BEV के लिए।

निष्कर्ष

हाइड्रोजन फ्यूएल सेल EV एक इमर्जिंग टेक्नोलॉजी हैं जो BEVs के जगह पे एक बढ़िया और इको फ्रेंडली मोबिलिटी अल्टरनेटिव प्रदान करती हैं। एफसीवी के फायदे हैं रेंज, रिफ्यूलिंग टाइम, मेंटेनेंस कोस्ट, और इको फ्रेंडली. लेकिन एफसीवी को भी चैलेंज का सामना करना पड़ता है; कोस्ट, एफिसिएंसी, और इंफ्रास्ट्रक्चर अवेलेबिलिटी में।

इसलिए, एफसीवी और BEV एक दूसरे के खिलाफ नहीं हैं, बाल्की कम्प्लीमेंटरी टेक्नोलॉजीज़ हैं जो अलग-अलग जरूरतों और प्रीफरेंस के ग्राहकों को केटर कर सकती हैं। इलेक्ट्रिक वेहिकल्स का फ्यूचर दोनों टेक्नोलॉजीज़ के डेवलपमेंट और इंटीग्रेशन पे निर्भर कर सकता है।

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